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ये हैं दुनिया की आसमान छूती मूर्तियां, देखने के लिए सिर उठाएंगे..तो गर्दन दर्द करने लगेगी

ये हैं दुनिया की आसमान छूती मूर्तियां, देखने के लिए सिर उठाएंगे..तो गर्दन दर्द करने लगेगी

पिछले दिनों केरल के कोवलम स्थित अजिमला शिव मंदिर में शिवजी की 58 फीट ऊंची प्रतिमा बनकर तैयार हुई। इसे केरल की सबसे बड़ी मूर्ति बताया गया है। इससे बनने में करीब 6 साल लगे। जिस मंदिर में यह मूर्ति स्थापित की गई है, वो 3500 स्क्वायर फीट में फैला है। इस प्रतिमा को गंगाधरेश्वर नाम दिया गया है। इसे देवदाथन नाम के एक आर्टिस्ट ने बनाया है। बता दें कि भारत में पहले ही दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति स्टैच्यू आफ यूनिटी बनकर तैयार हो चुकी है। आइए जानते हैं दुनिया की विशाल मूर्तियों के बारे में...
 

 

<p>पहले जानते हैं केरल के अजिमला में स्थापत मूर्ति के बारे में। इस मूर्ति का निर्माण करने वाले देवदाथन 29 साल के हैं। उन्होंने 22 साल की उम्र में इस मूर्ति का निर्माण शुरू किया था। चूंकि यह समुद्र के किनारे बनी है, इसलिए इसे खारे पानी से बचाने सीमेंट में विशेष केमिकल डाले गए हैं।<strong> अब देखते हैं दुनिया की विशाल प्रतिमाएं कहां स्थापित हैं...</strong></p>

 

पहले जानते हैं केरल के अजिमला में स्थापत मूर्ति के बारे में। इस मूर्ति का निर्माण करने वाले देवदाथन 29 साल के हैं। उन्होंने 22 साल की उम्र में इस मूर्ति का निर्माण शुरू किया था। चूंकि यह समुद्र के किनारे बनी है, इसलिए इसे खारे पानी से बचाने सीमेंट में विशेष केमिकल डाले गए हैं। अब देखते हैं दुनिया की विशाल प्रतिमाएं कहां स्थापित हैं...

<p><strong>स्टैच्यू ऑफ यूनिटी<br />
182 मीटर<br />
गुजरात-इंडिया</strong></p>

<p>इसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा माना गया है। इसका वजन 1700 टन है। अकेले मूर्ति के पैर की ऊंचाई ही 80 फीट है। सरदार पटेल की यह प्रतिमा नर्मदा घाटी में स्थापित की गई है। यह न्यूयॉर्क स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी ऊंची है। </p>

 

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
182 मीटर
गुजरात-इंडिया

इसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा माना गया है। इसका वजन 1700 टन है। अकेले मूर्ति के पैर की ऊंचाई ही 80 फीट है। सरदार पटेल की यह प्रतिमा नर्मदा घाटी में स्थापित की गई है। यह न्यूयॉर्क स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी ऊंची है। 

<p><strong>स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा<br />
153 मीटर<br />
चीन</strong><br />
यह दुनिया की एक विशाल प्रतिमा मानी जाती है। इसका निर्माण 1997 से शुरू हुआ था। इसका निर्माण 2008 में पूरा किया जा सका। प्रतिमा 20 मीटर लंबे कमल के फूल पर खड़ी है। इसमें तांबे के 1100 टुकड़े शामिल हैं।</p>

 

स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा
153 मीटर
चीन

यह दुनिया की एक विशाल प्रतिमा मानी जाती है। इसका निर्माण 1997 से शुरू हुआ था। इसका निर्माण 2008 में पूरा किया जा सका। प्रतिमा 20 मीटर लंबे कमल के फूल पर खड़ी है। इसमें तांबे के 1100 टुकड़े शामिल हैं।

<p><strong>लायकुन सेटकीयर<br />
116 मीटर<br />
म्यांमार</strong><br />
इसका निर्माण 1996 से 2008 तक चला था। प्रतिमा 13.5 ऊंचे सिंहासन पर खड़ी है। मूर्ति को ऊंचाई से देखने के लिए इसमें एक लिफ्ट लगाई गई है।</p>

 

लायकुन सेटकीयर
116 मीटर
म्यांमार

इसका निर्माण 1996 से 2008 तक चला था। प्रतिमा 13.5 ऊंचे सिंहासन पर खड़ी है। मूर्ति को ऊंचाई से देखने के लिए इसमें एक लिफ्ट लगाई गई है।

<p><strong>उशिकु दाईबुत्सु<br />
110 मीटर<br />
जापान</strong><br />
यह उशिकु शहर में स्थित है। यह प्रतिमा कांस्य से बनी है। इसमें ऊपर जाने के लिए एलीवेटर लगाया गया है। इस मूर्ति को देखने दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं।</p>

 

उशिकु दाईबुत्सु
110 मीटर
जापान

यह उशिकु शहर में स्थित है। यह प्रतिमा कांस्य से बनी है। इसमें ऊपर जाने के लिए एलीवेटर लगाया गया है। इस मूर्ति को देखने दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं।

<p><strong>गुयान यिन<br />
108 मीटर<br />
चीन</strong><br />
यह मूर्ति हेनान प्रांत में स्थित है। इसे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी प्रतिमा माना जाता है। इस मूर्ति में तीन अलग-अलग चेहरे हैं। इसे बनाने में करीब 6 साल लगे थे।</p>

 

गुयान यिन
108 मीटर
चीन

यह मूर्ति हेनान प्रांत में स्थित है। इसे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी प्रतिमा माना जाता है। इस मूर्ति में तीन अलग-अलग चेहरे हैं। इसे बनाने में करीब 6 साल लगे थे।

<p><strong>सम्राट यान और हुआंग<br />
106 मीटर<br />
चीन</strong><br />
ये मूर्तियां 1987 में बनना शुरू हुई थीं। ये 20 साल बाद पूरी हुईं। ये मूर्तियां हेनान प्रांत में स्थित हैं। इन मूर्तियों की आंखें 3 मीटर चौड़ी और नाक 6 मीटर है।</p>

 

सम्राट यान और हुआंग
106 मीटर
चीन

ये मूर्तियां 1987 में बनना शुरू हुई थीं। ये 20 साल बाद पूरी हुईं। ये मूर्तियां हेनान प्रांत में स्थित हैं। इन मूर्तियों की आंखें 3 मीटर चौड़ी और नाक 6 मीटर है।

<p><strong>सेंडाई डाइकानन<br />
100 मीटर<br />
जापान</strong><br />
यह प्रतिमा बौद्ध बोधिसत्व का प्रतिनिधित्व करती है। यानी बौद्ध के दर्शन दिखाती है। यह सेंडाई में स्थित है। यह मूर्ति पहाड़ी पर बनी है, इसलिए इसे कई शहरों से देखा जा सकता है। इसमें लिफ्ट लगाई गई है।</p>

 

सेंडाई डाइकानन
100 मीटर
जापान

यह प्रतिमा बौद्ध बोधिसत्व का प्रतिनिधित्व करती है। यानी बौद्ध के दर्शन दिखाती है। यह सेंडाई में स्थित है। यह मूर्ति पहाड़ी पर बनी है, इसलिए इसे कई शहरों से देखा जा सकता है। इसमें लिफ्ट लगाई गई है।

<p><strong>पीटर द ग्रेट स्टैच्यू<br />
98 मीटर<br />
रूस</strong><br />
यह मूर्ति मास्को शहर में मोजकेवा नदी के सामने बनी है। पीटर रूस के महान सम्राट थे। उन्होंने 43 वर्षों तक देश पर शासन किया था। इसका वजन 100 टन है। इसका 1997 में अनावरण किया गया था।</p>

 

पीटर द ग्रेट स्टैच्यू
98 मीटर
रूस

यह मूर्ति मास्को शहर में मोजकेवा नदी के सामने बनी है। पीटर रूस के महान सम्राट थे। उन्होंने 43 वर्षों तक देश पर शासन किया था। इसका वजन 100 टन है। इसका 1997 में अनावरण किया गया था।

<p><strong>ग्रेट बुद्धा <br />
92 मीटर<br />
थाइलैंड</strong><br />
इसे थाइलैंड की सबसे बड़ी मूर्ति होने को गौरव मिला है। इसका निर्माण काल 1990 से 2008 तक है। यह मूर्ति सीमेंट और कांक्रीट से बनी है। उसे सोने का रंग चढ़ाया गया है।</p>

 

ग्रेट बुद्धा 
92 मीटर
थाइलैंड

इसे थाइलैंड की सबसे बड़ी मूर्ति होने को गौरव मिला है। इसका निर्माण काल 1990 से 2008 तक है। यह मूर्ति सीमेंट और कांक्रीट से बनी है। उसे सोने का रंग चढ़ाया गया है।

<p><strong>ग्रांड बुद्धा<br />
88 मीटर<br />
चीन</strong><br />
यह चीन के लांगशान पर्वत पर मौजूद है। यह कांस्य से बनी है। इसका वजन 700 टन है। इसे देखने दुनियाभर से लोग आते हैं।</p>

 

ग्रांड बुद्धा
88 मीटर
चीन

यह चीन के लांगशान पर्वत पर मौजूद है। यह कांस्य से बनी है। इसका वजन 700 टन है। इसे देखने दुनियाभर से लोग आते हैं।

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