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 दुष्कर्म पीडि़ता के गिरफ्तारी वारंट को सिपाही ने मिथ्या रिपोर्ट के साथ लौटाया, कोर्ट ने कार्रवाई के लिए एसपी को लिखा पत्र

 दुष्कर्म पीडि़ता के गिरफ्तारी वारंट को सिपाही ने मिथ्या रिपोर्ट के साथ लौटाया, कोर्ट ने कार्रवाई के लिए एसपी को लिखा पत्र

 भीलवाड़ा हलचल। जिले के शंभुगढ़ थाने के एक सिपाही ने मिथ्या रिपोर्ट के साथ दुष्कर्म पीडि़ता का वारंट कोर्ट को लौटा दिया। सच्चाई सामने आने पर विशिष्ठ न्यायाधीश (पोक्सो-2) भूपेंद्रकुमार सनाढ्य ने सिपाही के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। 
ने पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुये पुलिस अधीक्षक को सिपाही के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। 
न्यायालय सूत्रों के अनुसार, एक पीडि़ता ने 10 सितंबर 2015 को शंभुगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पीडि़ता ने रिपोर्ट में बताया कि चार-पांच साल पहले जब वह नाबालिग थी और नौं वीं कक्षा में पढ़ रही थी,तब एक दिन मोड़ का निम्बाहेड़ा निवासी महावीर पुत्र सीताराम वैष्णव उसके घर आया। इस दौरान वह घर में अकेली थी। महावीर ने उसे साथ चलने के लिए कहते हुये बताया कि उसके (पीडि़ता) पिता का एक्सीडेंट हो गया है ओर वे, भीलवाड़ा अस्पताल में भर्ती है। इसके बाद पीडि़ता को गाड़ी में बैठा दिया और इसके बाद उसे रुमाल पर कोई पदार्थ सुंंघा दिया, जिससे वह बेहौश हो गई। उसे, रात बारह बजे चित्तौडग़ढ़ में एक कमरे पर उतारा। हौश आने पर चाकू दिखाकर धमकाया। इसके बाद वैन से उसे चित्तैडग़ढ़ कोर्ट ले गया, जहां उससे स्टांप पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिये। इसके बाद पीडि़ता को वह ट्रैवल्स बस से भीलवाड़ा के बहाने दिल्ली ले गया। वहां एक कमरे में उसे रखा और आरोपित उसके साथ दुष्कर्म करता रहा, जिससे पीडि़ता गर्भवती हो गई और उसने बच्ची को जन्म दिया। आरोपित, इस पीडि़ता को बाद में किशनगढ़ ले गया, जहां सात-आठ माह तक रखा। इसके बाद पीडि़ता को दस हजार रुपये में राहुल वैष्णव को बैच दिया। राहुल ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। 
राहुल उसे धनोप माता मंदिर ले आया, जहां पीडि़ता को उसके माता-पिता नजर आये तो वह दौड़कर उनके पास चली गई, जबकि डरके मारे राहुल, वैन लेकर भाग छूटा। पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया। इस मामले में न्यायालय में दुष्कर्म पीडि़ता की जिरह लंबे समय से शेष थी। पीडि़ता न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रही थी। इसके चलते न्यायालय ने पीडि़ता को गिरफ्तारी वारंट से तलब किया। यह वारंट पुलिस अधीक्षक के जरिये कोर्ट ने शंभुगढ़ थाने पर भिजवाया। 
सिपाही भागूराम ने गलत जानकारी के साथ लौटाया वारंट
शंभुगढ़ थाने से वारंट तामिल के लिए कांस्टेबल भागूराम 1736 को दिया गया। इस वारंट को सिपाही भागूराम ने इस टिप्पणी के साथ अदमतामिल कोर्ट को भिजवा दिया कि पीडि़ता उसके परिजन दस-पन्द्रह दिन पहले गुजरात में रिश्तेदारी में शादी होने से वहां जाने की कहकर गये, जो वापस नहीं आये। घर बंद पड़ा है।
न्यायालय ने जांची सत्यता तो...
सिपाही भागू राम द्वारा दी गई उक्त जानकारी की न्यायालय ने सत्यता की जांच करवाने के लिए एएसआई साबिर मोहम्मद को तलब किया। उन्होंने वारंट की तामिल करवाने वाले सिपाही भागूराम से वार्ता करने के बाद पीडि़ता को न्यायालय में पेश किया। 
पीडि़ता ने कहा, वो नहीं गये थे गुजरात
न्यायालय में पेश की गई पीडि़ता से न्यायालय द्वारा पूछवाने पर उसने चार-पांच दिन से बुखार होने और दो-तीन वर्षों से माता-पिता के पास ही रहने व पिछले दो-तीन माह से गुजरात नहीं जाने की बात कही। 
मिथ्या रिपोर्ट पर न्यायालय सख्त
सिपाही की दी गई जानकारी गलत होने का पता चलने पर न्यायालय ने सख्त रवैया अख्तयार करते हुये पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा कि उक्त सिपाही ने बदनियति पूर्व प्रकरण के विचारण में विलंब उत्पन्न करने की दृष्टि से जानबुझकर मिथ्या रिपोर्ट के साथ वारंट अदम तामिल प्रस्तुत किया। सिपाही का उक्त कृत्य गंभीर है। न्यायालय ने वारंट की फोटो प्रति के साथ पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर उक्त सिपाही भागूराम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर न्यायालय को अवगत कराने के लिए कहा है। 

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