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उद्यमिता को बढ़ावा

उद्यमिता को बढ़ावा

दूरगामी लक्ष्यों को हासिल करने में नवउद्यमिता की क्षमता एक इंजन की भांति होती है. बीते कुछ वर्षों से कारोबारी सोच और उसे मिलनेवाले समर्थन को लेकर देश में एक बदलाव देखा जा रहा है. यही वजह है कि कोविड-19 महामारी में भी भारतीय स्टार्टअप उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज करते रहे. इस अवधि में एक अरब डॉलर की सीमा पार कर 11 कंपनियां यूनिकॉर्न स्टार्टअप की श्रेणी में दाखिल हुईं.

नासकॉम की टेक स्टार्टअप 2021 की रिपोर्ट बताती है कि भारत में 38 स्टार्टअप यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर चुके हैं. स्टार्टअप एक ऐसा प्लेटफार्म है, जहां नये दौर के उद्यमी लीक से हटकर सोचते हैं और ऐसे उत्पादों तथा सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में सफल होते हैं, जो बदलती दुनिया की जरूरत बन रहे होते हैं. नासकॉम के टेक्नोलॉजी व लीडर‍शिप फोरम में प्रधानमंत्री मोदी ने देश के तकनीकी उद्योग से ऐसे उत्पादों को तैयार करने का आह्वान किया है, जो वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर सकें.

 प्रधानमंत्री मोदी का कहना सही है कि मूल्य निर्धारण तथा कार्ययोजना तक सीमित रहने के बजाय नवउद्यमियों को ऐसी संस्थाओं को तैयार करने पर जोर देना होगा, जो नयी सदी की मांग के अनुरूप हों. बदलाव स्वीकार नहीं करने से हम अनुगामी बन कर रह जायेंगे और हम कभी ग्लोबल लीडर नहीं बन पायेंगे. आज तकनीक ने आमजन को सक्षम बनाया है और लोगों को सरकार से जुड़ने में मदद की है. अलग-अलग क्षेत्रों में नवोन्मेष और नवउद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं और इसे गतिमान करने के लिए तीन अहम जरूरतों- पूंजी, प्रोत्साहन और संयोजन पर कार्य किया जा रहा है.

इससे दूसरे और तीसरे कतार के शहरों तथा कस्बों में भी उद्यमिता को लेकर सोच में परिवर्तन आ रहा है. स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम के तहत महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी तमाम प्रयासों के सफल होने का संकेत है. मोबाइल एप स्टार्टअप, मुद्रा बैंक योजना, सामाजिक-आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्गों के उद्यमियों के लिए कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने जैसे कार्यक्रमों का विस्तार हो रहा है.

इसके साथ हमें पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी व सरलीकृत करने, शुरुआती आर्थिक समर्थन देने और उद्योग तथा अकादमिक जगत की परस्पर भागदारी को बेहतर बनाने पर जोर देना होगा, ताकि कारोबार से जुड़ी शुरुआती चुनौतियों और चिंताओं का हल निकाला जा सके. समावेशी तथा नवोन्मेषी माहौल की बेहतरी के लिए महिला उद्यमियों की भागीदारी आवश्यक है.

साथ ही वैश्विक मांग और जरूरतों के मद्देनजर घरेलू नीतियों में परिवर्तन जरूरी है, क्योंकि आवश्यक ढांचा तथा समर्थन मुहैया कराने में जिम्मेदारी स्थानीय सरकारों की है. सामाजिक क्षेत्र की अनेक नियामक बाधाओं को दूर कर कारोबारी संस्कृति को समावेशी बनाया जा सकता है. संस्थापकों, निवेशकों और उपभोक्ताओं के बीच तालमेल बढ़ानेवाले उपायों पर ध्यान देना होगा, जिससे देश में स्टार्टअप की बुनियाद मजबूत बन सके.

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