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रियायती दरों पर  स्कूलों-अस्पतालों और संस्थानों को  जमीन की 15 दिन में जांच के आदेश , अब  गिर सकती है गाज

रियायती दरों पर  स्कूलों-अस्पतालों और संस्थानों को  जमीन की 15 दिन में जांच के आदेश , अब  गिर सकती है गाज

 भीलवाड़ा( हलचल) रियायती दर पर जमीन लेकर उसका दुरुपयोग करने वाली संस्थाओं पर अब गाज गिर सकती है स्वायत्त शासन मंत्री ने भीलवाड़ा के साथ ही प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को इस मामले में भौतिक सत्यापन के आदेश दिए हैं इन आदेशों के बाद ऐसी संस्थाओं और लोगों में हड़कंप मचा है जिन्होंने कोठियों के नाम पर करोड़ों की जमीन तो ले ली लेकिन उसका दुरुपयोग किया जा रहा है।
 मंत्री शांति धारीवाल ने सभी निकायों को इन जमीनों का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। अगर आवंटन शर्तों का मौके पर पालन होता नहीं दिखा तो राज्य सरकार ऐसे आवंटनों को निरस्त करेगी।

मंत्री की ओर से जारी आदेशों के तहत आवंटन नीति के तहत निकाय की गठित समिति अपने क्षेत्र के प्रकरणों का भौतिक सत्यापन करेगी। इसके लिए 15 दिन का समय दिया गया है। आवंटन की शर्तों की अवहेलना या भूमि का किसी अन्य उपयोग होने की स्थिति में आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई होने के तीन दिन के अंदर जमीन का भौतिक कब्जा लिया जाएगा। आदेश में यह भी लिखा गया है कि जिन प्रकरणों में आवंटन की शर्तों की पालना और भूमि का सही उपयोग मिलता है तो उन प्रकरणों में समिति में शामिल प्रत्येक अधिकारी प्रमाण पत्र देगा। जिसमें यह प्रमाणित किया जाएगा कि प्रकरण में आवंटन की शर्तों और भूमि के उपयोग की शर्त की पालना की जा रही है। इसके बाद उस प्रकरण में शर्तों अवहेलना मिलती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।धारीवाल ने पत्रावली पर यह आदेश प्रमुख सचिव नगरीय विकास और स्वायत्त शासन सचिव को जारी किए हैं। इस आदेश की पालना के लिए जल्द ही नगरीय विकास विभाग और स्वायत शासन विभाग निर्देश जारी करेंगे। इसके बाद निकाय भौतिक सत्यापन की कार्रवाई शुरू करेंगे।

  उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा में कई ऐसी संस्थाओं और लोगों को जमीन आवंटित की गई है जिनका मैं तो उपयोग किया जा रहा है जबकि कई जमीनों का दुरुपयोग हो रहा है इस नाम और काम के लिए जमीन ली गई उसे दरकिनार कर ऐसी जमीनों का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है कई भूखण्ड तो ऐसे भी है जिन पर सिर्फ वर्षों से संस्थाओं समाज आदि के बोर्ड लगे हुए हैं। जबकि कुछ पर तो अभी चारदीवारी तक नहीं हो पाई है।