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"मान जाइये" .. "मान जाइये" .. "बात मेरे दिल की" .... "लापरवाह" रहे तो "कोरोना" अब ज्यादा पड़ेगा "भारी"


       -सुशील चौहान - 
भीलवाड़ा। कोरोना मरीज़ कम क्या हुए  "रोल मॉडल भीलवाड़ा" तो जैसे "कोरोना" से हमेशा के लिए "फ्री" ही गया, लेकिन हालात कुछ अलग है मौसम करवट ले रहा है तो लोगों को "सर्दी" में भी "गर्मी" का "अहसास" भले ही हो रहा है लेकिन  यह अहसास "तकलीफ" "देह" है।  सरकारी एमजीएच के अलावा प्राइवेट अस्पतालों में सर्दी खांसी जुकाम ओर बुखार के "ताबड़तोड़" मरीज़ पहुँच रहे है। यही हालात "डराने" वाले लग रहे है । महाराष्ट्र में "कोरोना" का "वेलकम बैक" हो चुका है और उसका सीधा ओर साफ कारण अस्पतालों में मरीज़ों की हर रोज़ बढ़ रही" रेलमपेल" है।  एक तरफ तो कोरोना की जंग लड़ने वालों को "टीका"  लगाया जा रहा है। वही शहर में कोरोना के "कम बैक" के रास्ते खोले जा रहे है। महाराष्ट में कोरोना "वापसी" से "सबक" लेने का यही "सही समय" है वरना कोई आश्चर्य नहीं कि अभी "दस पांच" के आंकड़े तक सिमट रहा कोरोना  "आंकड़ा" एकाएक  बढ़ जाये और आकड़ों पर किसी का "अंकुश" न रहे।   "कोरोना मॉडल"  रहे  भीलवाड़ा के लिए अभी से "अलर्ट" रहने का "टाइम" है क्योंकि "उप चुनावी" दौर में स्वास्थ्य मंत्री जी का "डेरा" भी "यही" है। कही ऐसा न हो कि कोरोना  मरीज़  बढ़ जाये ओर इस "वोटिंग टाइम" पर "मतदाता" ओर "मतदान" पर भारी पड़ जाए। स्वयं स्वास्थ्य मंत्री जी भी कोरोना की " चपेट" में आए हुए हैं। पंचायत चुनाव के दौरान हुए बीमार को वो भूले नहीं हैं। 
"लाँक डाउन" में छूट मिलते ही "हम" शहरवासी फिर पुराने "ढर्रे" पर आ गए मुंह से "नकाब" यानी मास्क हट गया। सौशल डिस्टेंस का "जुमला" तो मानो "छूमंतर" हो गया। लोग तो ऐसे बेफिक्र हो गए कि अब कोई डरने की बात नहीं क्योंकि हमने कोरोना को मात देने वाली "वैक्सीन" बना ली हैं। लेकिन भाई यह वैक्सीन उस समय नहीं लगेगी । कोरोना के उपचार के बाद लगेगी ।पहले कोरोना के लक्षण आते ही आपको अपने परिवार से "चौदह दिन" का "वनवास" तो भुगतना ही पड़ेगा।और अगर आपकी थोड़ी सी लापरवाही से कोरोना ने आपके फेफड़ों में "दस्तक" दे दी तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी।क्योंकि इस बार फेफड़ों में असर हो गया तो समझो वक्त पर इलाज हो गया तो ठीक वरना फोटू पर माला लटकने में देर नहीं होगी। इसलिए मास्क ही बचाव हैं। " बिना मास्क प्रवेश निषेध हैं" के स्टीकर चिकित्सालय सहित अन्य सरकारी कार्यालयों की "दीवार" की "शोभा" बने हुए हैं। शहर में लोग बिना मास्क के बेधड़क हो कर घूम रहे हैं। चले जाओ किसी भी दुकान पर.वहां ना तो दुकानदार ना ही ग्राहक मास्क लगा रहे हैं । अब सुबह की सब्जी, माणिक्य चौराहे, शाम की सब्जी मंडी या मुख्य सब्जी मंड़ी में सौशल डिस्टेंस व मास्क की खुलकर अवहेलना हो रही हैं नगर परिषद के कर्मचारी  मास्क नहीं  लगाने वालों के "चुनिंदा" स्थानों पर ही चालान काट कर अपनी "पीठ" थपथपा रहे हैं। इस बार लोगों ने लापरवाही की तो भीलवाड़ा माँडल   को भूल कर कोरोना का दंश झेलना पड़ेगा। इसलिए  यातायात विभाग का यह जुमला याद रखे " सावधानी हटी, दुघर्टना घटी" जिदंगी का अंग बन जाएगी। कोरोना के हमने अपने कई "अजीजों " खोया हैं।इसलिए "मास्क" पहने "सौशल डिस्टेंस" का पालन करें। यही ही हैं कोरोना से "बचाव" का बेहतर उपाय। इसलिए तो कहते हैं " दो गज की दूरी मास्क हैं जरूरी"। तो शहर वासियों संभल जाओ  कोरोना "गया" नहीं हैं थोड़ा "थमा" हैं। इसलिए लापरवाही ना करें।