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135 कर्मचारियों को उप चुनाव से पहले मिला तोहफा

135 कर्मचारियों को उप चुनाव से पहले मिला तोहफा

भीलवाड़ा (हलचल) स्पिनफैड गंगापुर के 135 श्रमिकों को सहाड़ा विधानसभा के होने वाले उपचुनाव से पहले राज्य सरकार ने इन्हें नौकरी देकर तोहफा दिया है। सरकार ने इन श्रमिकों को 23 नगर निगम, नगर परिषद तथा नगर पालिकाओं में लगाने का निर्णय लिया है। वित्त विभाग ने इसकी मंजूरी भी दे दी है। सहकारिता विभाग के मुख्य सचिव की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव के आधार पर 135 कर्मचारियों को नौकरी पर लगाया गया है। गंगापुर स्पिनफैड लम्बे समय से बंद पड़ी है। राज्य सरकार ने श्रमिकों एवं उनके परिवारों के भरण पोषण एवं हित में निर्णय लेते हुए यह स्वीकृति जारी की है।
स्वायत शासन विभाग के अतिरिक्त निदेशक संजीव कुमार पाण्डेय ने गुरुवार को आदेश जारी कर इन सभी 135 जनों को विभिन्न नगर निकाय में लगाया है। इन सभी को आदेश जारी होने के 15 दिवस में अपनी उपस्थिति सम्बन्धित विभाग में देनी होगी। इसके बाद यह आदेश स्वत: ही निरस्त हो जाएगा। पद ग्रहण करने से पूर्व दो उत्तरदायी व्यक्तियों से प्रमाणित स्वयं का चरित्र प्रमाण पत्र, सक्षम स्तर से जारी चिकित्सा प्रमाण पत्र, पुलिस सत्यापन प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा श्रमिक की जन्म तिथि शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य दस्तावेजों की जांच मूल प्रमाण पत्रों से किया जाएगा। पद ग्रहण करने के समय अन्य किसी जगह नियोजित नहीं होना चाहिए। श्रमिक का दो वर्ष तक परिवीक्षाकाल पर रहेंगे। इस दौरान स्पिनफैड में मिल रहे वेतन, भत्तों को सुक्षित रखते हुए निर्धारित फिक्स वेतन देय होगा।
यहां लगया श्रमिकों को
नगर निगम अजमेर 6, उदयपुर 10, भरतपुर 9, बीकानेर 10, नगर परिषद चित्तौडगढ़़ 1, नागौर 6, ब्यावर 15, किशनगढ़ 5, धोलपुर 1, सवाईमाधोपुर 6, गंगापुर सिटी 8, श्री गंगानगर 10, हिण्डौनसिटी 5, अलवर 15, नगर पालिका गुलाबपुरा 4, निम्बाहेड़ा 1, डीग 1, बयाना 2, खैरथल 5, तिजारा 2, लालसोट 5 तथा सरदार शहर में 8 श्रमिकों को चतुर्थ श्रेणी के पद पर लगाया है।
जुलाई 2017 में लगा दिया था ताला
भीलवाड़ा जिले के गंगापुर स्पिनफेड पर जुलाई 2017 में ताला लटका दिया थआ। उस समय तक सरकार 346 श्रमिकों को ले ऑफ दे रही थी। मंत्रिमंडलीय उप समिति के स्पिनफेड यूनिट को बंद करने के निर्णय में योग्य श्रमिकों को अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर भेजने की बात कही गई थी। उसके चलते ही यह नियुक्ति दी गई है। वर्ष 1981 में सात सितंबर को शुरू हुई गंगापुर को-ऑपरेटिव सूती धागा मिल ने हजारों श्रमिकों को न सिर्फ रोजगार दिया बल्कि गंगापुर बाजार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी रही है। यह कभी एशिया में गुणवत्ता की दृष्टि से नंबर वन यूनिट रही थी। अब ये यूनिट सिर्फ इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह गई है।