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कवि शक्तिदान कविया के निधन से राजस्थानी साहित्य जगत को आघात - राव

कवि शक्तिदान कविया के निधन से राजस्थानी साहित्य जगत को आघात - राव

 राजसमन्द( राव दिलीप सिंह)  राजस्थानी साहित्य के वरिष्ठतम विद्वान सिध्दहस्त कवि-आलोचक शक्तिदान कविया के असामयिक निधन पर अपना शोक प्रकट करते हुए राजस्थानी भाषा साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य  नारायणसिंह राव निराकार  ने कहा कि कविया के निधन से साहित्य जगत को अपूरणीय  क्षति हुई है, वहीं राजस्थानी की समृद्ध काव्य यात्रा में एक आघात लगा है। जिससे पूरा राजस्थानी जगत शोकमग्न है।

अपनी वेदना प्रगट करते हुए साकेत साहित्य संस्थान के जिला अध्यक्ष परितोष पालीवाल ने कहा कि शक्तिदान कविया द्वारा राजस्थानी को दी गई महत्वपूर्ण सेवाओं को राजस्थानी जगत हमेशा याद करता रहेगा। राजस्थानी भाषा को परिभाषित करती उनकी अमर कविता ने जन मानस को उद्देलित किया हैं।

अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए मेवाड़ी भाषा के कवि राजेन्द्र राजन  ने कहा कि शक्तिदान कविया बहुआयामी प्रतिभा के धनी तो थे ही वहीं राजस्थानी की संवैधानिक मान्यता एवं दूसरी राजभाषा के सच्चे पेरोकार थे। नई पीढी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। 

शोक वेदना-संवेदना प्रकट करने वालों में  डॉ राकेश तैलंग छगनलाल प्रजापत वीणा वैष्णव कुसुम अग्रवाल कमलेश जोशी राधेश्याम राणा  रामगोपाल आचार्य प्रेम कुमावत  हेमेंद्रसिंह चौहान ज्योत्स्ना पोखरना  छैलबिहारी शर्मा यशवंत शर्मा धर्मेंद्र सालवी डॉ तन्मय पालीवाल मुकेश वैष्णव गोपालकृष्ण खंडेलवाल मनोजसिंह राजवा महेंद्रसिंह राजपूत यशवंती तिवारी बंशीलाल गुर्जर सहित सभी साहित्यकारो ने  शक्तिदान कविया की राजस्थानी मान्यता की पीड़ा को रेखांकित करते हुए कहा कि कविया को सच्ची श्रृद्धांजलि तभी होगी जब आप और जब हम राजस्थानी भाषा  को

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